बदायूं ।
देश के कर्मचारियों को मिलने वाली मंहगाई वृद्धि को रोककर उसकी अवशेष राशि के भुगतान को न देने के सरकारी फैसले को वापस लेने की मांग की गई है । पूर्व प्रिंसिपल सुनील मिश्र ने पीएम व सीएम को भेजे गए ट्वीट में ऐसे सरकारी आदेश को तुगलकी जज़ियाकर कहा है ।
कोरोना वायरस से लड़ाई जीतने के लिए लॉक डाउन लागू करके जो प्रयास सरकार द्वारा किये जा रहे हैं उनकी सराहना करते हुए सुनील मिश्र ने देश मे आए आर्थिक संकट पर भी चिंता जताई है । उन्होंने आर्थिक संसाधन जुटाने के लिये सिर्फ सरकारी और अर्द्ध सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को ही लक्ष्य बनाने को अव्यवहारिक बताया । उन्होंने तर्क दिया है कि एक ओर प्रधानमंत्री प्राइवेट सेक्टर में कह रहे हैं कि अपने कर्मचारियों का वेतन न रोकें न काटें बल्कि हो सके तो एडवांस भी दें । वहीं सरकारी कर्मचारियों की मंहगाई वृद्धि रोककर उसका अवशेष न देना एक तरफा फैसला है । उन्होंने कहा कि ऐसा लगता कि इस वायरस को लाने और फैलाने में कर्मचारियों पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है जिसकी भरपाई भी उन्हीं से होगो ।
उन्होंने बताया कि तुगलक काल और उससे पूर्व में भी शासको ने धर्म और वर्ग भेद के आधार पर जज़िया कर लगाकर मनमानी पूर्ण गलत वसूली की नज़ीर भी दी है । कर्मचारियों में , विशेषकर पेंशनर्स के बीच पनप रहे रोष का जिक्र करते हुए उन्होंने मंहगाई वृद्धि रोकने के आदेश को वापस लेने की मांग केंद्र व राज्य सरकारों से की है ।
उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के पूर्व प्रांतीय महामंत्री सुनील मिश्र ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों से सामर्थ्य और श्रद्धा अनुसार व्यक्तिगत सहायता देते रहने की अपील भी की है । इससे पूर्व भी कर्मचारियों द्वारा एक दिन का वेतन आदि सहायता देने की उन्होंने सरहाना भी की । उन्होंने सरकार को चेताया कि यदि मंहगाई भत्ता वृद्धि आदेश वापस नहीं लिया �
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